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Monday, November 16, 2015

Aditya Hridaya Stotra (with lyrics)



The most powerful prayer in praise of Surya, the Sun God. Given to him by Agastya Rishi, it was recited by Lord Rama before his battle with Ravan.

Suryadev or the Sun God is treated as the 'adi deva' in Hindu mythology because He is the only one among all gods who is 'pratayaksha' or visible. 

All the stutis and stotras in this song has been taken from the Valmiki's Ramayan.

Lyrics (Sanskrit)

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥१॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद् राममगरत्यो भगवांस्तदा ॥२॥

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्यं सनातनम्।
येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥३॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥४॥

Lyrics (English)

tato yuddhaparishrantam samare chintaya sthitam |
raavanam chaagrato dhrishtvaa yuddhaaya samupasthitam | 1 |

devataishcha samaagamya drishtumabhyaagato ranam |
upagamyaabraveed ramamagastyo bhagavaanstadaa | 2 |

rama rama mahaa baaho shrinu guhyam sanaatanam |
yena sarvaanareen vatsa samare vijayayishyase | 3 |

aaditya hridayam punyam, sarvashatru vinaashanam |
jayaavaham japam nityamakshayam paramam shivam | 4 |

Monday, December 15, 2014

श्री हनुमान चालीसा


श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारी
बरनौ रघुबर बिमल जसु, जो दायकू फल चारि
बुध्दि हीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार |
बल बुध्दि विद्या देहु मोंही , हरहु कलेश विकार ||

चोपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर |
जय कपीस तिहुं लोक उजागर ||
राम दूत अतुलित बल धामा |
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी|
कुमति निवार सुमति के संगी ||
कंचन बरन बिराज सुबेसा |
कानन कुण्डल कुंचित केसा ||

हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे|
काँधे मूंज जनेऊ साजे||
संकर सुवन केसरी नंदन |
तेज प्रताप महा जग बंदन||

विद्यावान गुनी अति चातुर |
राम काज करिबे को आतुर ||
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया |
राम लखन सीता मन बसिया ||

सुकसम रूप धरी सियहि दिखावा |
बिकट रूप धरी लंक जरावा ||
भीम रूप धरी असुर संहारे |
रामचंद्र के काज संवारे ||

लाय संजीवनी लखन जियाये |
श्रीरघुवीर हरषि उर लाये ||
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई |
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ||

सहस बदन तुम्हरो जस गावे |
अस कही श्रीपति कंठ लगावे ||
सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा|
नारद सारद सहित अहीसा ||

जम कुबेर दिगपाल जहा ते|
कबि कोबिद कही सके कहा ते||
तुम उपकार सुग्रीवहीं कीन्हा |
राम मिलाय राज पद दीन्हा ||

तुम्हरो मंत्र विभिषण माना |
लंकेश्वर भए सब जग जाना ||
जुग सहस्र योजन पर भानू |
लील्यो ताहि मधुर फल जाणू ||

प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहीं|
जलधि लांघी गए अचरज नाहीं||
दुर्गम काज जगत के जेते |
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||

राम दुआरे तुम रखवारे |
होत न आग्यां बिनु पैसारे ||
सब सुख लहै तुम्हारी सरना |
तुम रक्षक काहू को डरना ||

आपन तेज सम्हारो आपे |
तीनों लोक हांक ते काँपे ||
भुत पिशाच निकट नहिं आवे |
महावीर जब नाम सुनावे ||

नासै रोग हरे सब पीरा |
जपत निरंतर हनुमत बीरा ||
संकट से हनुमान छुडावे |
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै||

सब पर राम तपस्वी राजा |
तिन के काज सकल तुम साजा ||
और मनोरथ जो कोई लावे |
सोई अमित जीवन फल पावे ||

चारों जुग प्रताप तुम्हारा |
है प्रसिद्ध जगत उजियारा ||
साधु संत के तुम रखवारे |
असुर निकंदन राम दुलारे ||

अष्ट सिद्धि नौनिधि के दाता |
अस बर दीन जानकी माता ||
राम रसायन तुम्हरे पासा |
सदा रहो रघुपति के दासा ||

तुम्हरे भजन राम को पावे |
जनम जनम के दुःख बिस्रावे ||
अंत काल रघुबर पुर जाई |
जहा जनम हरी भक्त कहाई ||

और देवता चित्त न धरई |
हनुमत सेई सर्व सुख करई||
संकट कटे मिटे सब पीरा |
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||

जय जय जय हनुमान गोसाई |
कृपा करहु गुरु देव के नाइ ||
जो सत बार पाठ कर कोई |
छूटही बंदी महा सुख होई ||

जो यहे पढे हनुमान चालीसा |
होय सिद्धि साखी गौरीसा ||
तुलसीदास सदा हरी चेरा |
कीजै नाथ हृदये मह डेरा ||

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रूप |
राम लखन सीता सहित , ह्रुदय बसहु सुर भूप ||

Monday, September 1, 2014

Live Aarti of Maa Ganga at Har Ki Pauri (Haridwar) (Hindi) (1080p HD)



Har Ki Pauri is famous ghat on the banks of the Ganges in Haridwar in Uttarakhand.

Lord Shiva and Lord Vishnu are believed to have visited the Brahmakund in Har Ki Pauri in the Vedic times.

The Har Ki Pauri temple carries even more significance, because it preserves the footprints of Lord Shiva even to this day. Vedic chants and the sound of temple bells reverberate throughout the day.

Har Ki Pauri is also known as Brahmakund. According to the Hindu mythology, it was King Vikrmaditya who built the sacred bathing ghats in Har ki Pauri in the memory of his brother, Bhatrihari who had come to meditate in Haridwar.

Har ki Pauri is believed to be the place of exit of holy river Ganga from the mountains. 

Ganga Aarti is takes place in Brahmakund area of Har ki Pauri, a sacred spot where it is believe that the drops of the nectar (Amrit) fell over from the sky while being carried in a pitcher by the celestial bird Garuda after the Samudra Manthan.

According to the Hindu mythology, Lord Vishnu had visited Brahmkund in Har ki Pauri and a stone wall also has a large footprint which is believed to be belong to Lord Vishnu. 

In Sanskrit, Hari means "Lord Vishnu" and dwar means "gate" or "gateway" So, Haridwar stands for "Gateway to Lord Vishnu". Haridwar is also known as the home of Devi Sati and the palace of her father Daksha. In ancient times, the town was referred to as Gangadwar, the place where the Ganga descends to the plains.

Also known as the "Gateway to God" Haridwar is one of the Holiest places of the Hindus who visit Har Ki Pauri for a Holy Dip in the sacred Ganges.

A large number of people gather on both the banks of river Ganges to sing its praises. The priests hold large fire bowls in their hands, the songs in the temples at the Ghat start ringing. People float earthen Diyas, with burning flickers and flowers in them as a symbol of hope and wishes .The golden hues of floral diyas reflected in the river Ganges presents spectacular view.

Aarti symbolize 5 thing mainly these are 
  • Ether (Akash) 
  • Wind (Vayu) 
  • Fire (Agni) 
  • Water (Jal) 
  • Earth (Pruthvi)
In Sanskrit the meaning of "Aa" is "towards or to" and the meaning of "rati" is right or virtue". Ganga Aarti is a devotional ceremony that uses fire as an offering. It is usually made in the form of a lit lamp. A group of Brahmans offer their holy mantras to river Ganges during Ganga Aarti.

The devotees offer flowers and earthen lamps to river Ganges in order to pay due regards to their ancestors in heaven. 

Har Ki Pauri attracts millions of Hindu devotees from almost every corner of the earth. Throughout the day, devotees keep on taking a holy dip in the Ganges and offering prayers at Har Ki Pauri.

The Haridwar Ganga Sabha is an ancient Sabha that was came into being in the centaury of 1816. In 2005, the Ganga Mahasabha was restructured. After the restructuring Ganga Mahasabha has been playing the leading role in coordinating mass movements, public awareness campaigns and various other efforts to protect Mother Ganga.

Har ki Pauri is located at the centre of Haridwar city on the banks of river Ganga. One can reach easily at Har ki Pauri by auto rickshaw from Haridwar Bus Stand.

Ganga Aarti in Hardwar city starts at around 6.30pm on two times. Aarti is performed daily at the Har ki Pauri Ghat at Morning sunrise and evening sunset. Total duration of Aarti is 20 to 25 minutes.

Wednesday, May 15, 2013

Mantra related to Seven Chakras ~ Dr Darshan Dhamija (Hindi)



Watch out secret mantras related to seven chakras (Power Center) of Human bodies from Dr Darshan Dhamija (Cosmetic Healer) for improving Health and desires success. Our body has seven charkas (Power Center). Each chakra has own qualities and divine powers. We have one specific mantra for each chakra to wake up those holy powers.

Wednesday, April 3, 2013

हनुमान मंत्र


हर सुबह बोलें यह हनुमान मंत्र.. मन को न सताएगा कोई भय-संशय

हनुमान भक्ति जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। हनुमानजी का स्मरण किसी भी वक्त अच्छे कामों व सोच की प्रेरणा ही देता है। इसलिए बताए गए मंत्र से हर रोज सुबह श्री हनुमान का स्मरण किया जाए तो लक्ष्य की सफलता को लेकर पैदा होने वाले भय-संशय व बाधाएं खत्म हो जाती हैं।

।। ॐ नमो हनुमंते भय भंजनाय सुखम कुरु फट स्वाहा ।।

भावार्थ :  हे हनुमानजी महाराज मैं आपकौ नमन करता हुं.. भय को दूर करनेवाले ऐसे देव को प्रणाम करता हुं प्रार्थना करता हुं… हे हनुमानजी महाराज आप हमारे दुख दूर करे और हमारे जीवन में भरपूर सुख दे

Thursday, February 7, 2013

श्री शिर्डी साईं बाबा की आरती


आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुखवर की !
जाकी कृपा विपुल सुखकारी, दुःख शोक संकट भयहारी !
शिर्डी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया !
कितने भक्त शरण में आये, वे सुख, शांति, चिंतन पाए!
भाव धरे जो मन में जैसा, पावत अनुभव वो ही वैसा !
गुरु की उदी लगावे तन को, समाधान लाभत उस मन को !
साईं नाम सदा जो गावे, सो फल जग में शाश्वत पावे !
गुरुवार करि पूजा सेवा, तापर कृपा करत गुरुदेवा !
राम, कृष्ण, हनुमान रूप में, दें दर्शन जानत जो मन में !
विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन इच्छित फल वो पाते !
जय बोलो साईं बाबा की, जय बोलो अवधूत गुरु की !
साईं दास आरती को गावें, सो फल जग में शाश्वत पावें !
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुखवर की !

बोलिए सच्चिदानंद सदगुरु साईंनाथ महाराज की जय !

Thursday, November 29, 2012

Gayatri Mantra Anuradha Paudwal




Gayatri Mantra (It Contains Powers, Energy and its singing repeatedly Benefits Mental, Physical and Spiritual Health) "Aum Bhoor Bhuvaha Swaha, Tatsavitur Varenyam, Bhargo Devasya Dheemahi, Dheeyo Yo Nah Prachodayat.''

Saturday, March 31, 2012

शिव पंचाक्षर स्त्रोत


नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय|
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे "न" काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय|
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे "म" काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय|
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै "शि" काराय नमः शिवायः॥

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय|
चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै "व" काराय नमः शिवायः॥

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय|
दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ|
शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

शिव स्तुति


हे नाथ जानि अजान बालक विश्वनाथ महेश्वरम | 
करिके कृपा दीजो दरस अविनाशी शंकर सुन्दरम ||
आया शरण हूँ आपकी इतनी अनुग्रह किजीये |
जय चंद्र मौली कृपालु अब तुम दरश मोको दीजिये ||
ले राम नाम निशंक कीन्हों है गरल आहार तुम | 
भव सिंधु से नैया कर देना भोला पार तुम ||
मनसा वाचा कर्मणो से पाप-अति हमने कियो |
आयो शरण शरणागति की सुध नहीं अब तक लियो ||
अब तो तुम्हारे हाथ है, गिरिजापति मेरी गति|
जय पशुपति, जय पशुपति, जय पशुपति, जय पशुपति ||

जय जयति योगेश्वर तुम्ही बल , बुद्धि के प्रकाश तुम |
मन-मंदिर बीज निवास करिये जानि जन सुख राशि तुम ||
लज्जा हमारी रखना शिव आपके ही हाथ है |
तुमसा ना कोई भक्त वत्सल कृपालु दीनानाथ है ||
त्रय ताप मोचन जय त्रिलोचन पूर्ण पारावार जय |
कैलाशवासी सिद्ध कशी दया के अधर जय ||
शिव दया के सिंधु हो जन है शरण जन फेरिए |
करिके कृपा की कोर शंकर दीन जन दिशि हेरिये ||
शुभ बेल के कुछ पत्र हैं, कुछ पुष्प हैं मंदार के |
फल है धतूरे के धरे, कुछ संग अछत धारि के ||
सेवा हमारी तुच्छ है , फल कामना मन मे बड़ी |
पर आशा भोले नाथ से , रहती ह्रदय मे बड़ी ||
हे विश्वनाथ महेश अपनी, भक्ति कृपया दीजिये |
निर्भय निडर निशंक करिये , शक्ति अपनी दीजिये ||
हो सत्य व्रतधारी ह्रदय मे, भावना ऐसी भरें |
बम बम हरे, बम बम हरे, बम बम हरे, बम बम हरे ||

मण्डित जटा मे गंग धारा, ताप लोको के हरे |
शशिभाल तब यश चाद्रिका , सबके ह्रदय शीतल करें ||
वरदे वरद वरदानियों धन धान्य से धरती भरें |
जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे||
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